
मिडिल ईस्ट में चल रही जंग अब सिर्फ मिसाइलों और हवाई हमलों तक सीमित नहीं रही। इसकी गूंज सीधे भारत के खेतों और मंडियों तक पहुंच गई है। युद्ध की वजह से दुबई के बड़े समुद्री हब पर शिपिंग ठप हो गई है और भारत से भेजा गया कृषि माल कंटेनरों में बंद होकर सड़ने लगा है।
निर्यातकों के लिए यह सिर्फ व्यापारिक संकट नहीं, बल्कि भरोसे और बाजार दोनों का झटका है। जिस खाड़ी बाजार पर भारतीय फल-सब्जी उद्योग टिके हुए हैं, वही रास्ता इस वक्त बंद पड़ा है।
जेबेल अली पोर्ट पर फंसे कंटेनर
दुबई का Jebel Ali Port पूरे मिडिल ईस्ट का सबसे बड़ा ट्रांजिट हब माना जाता है। खाड़ी देशों के लिए आने-जाने वाला अधिकांश कार्गो इसी रास्ते से गुजरता है। लेकिन पिछले कई दिनों से हालात ऐसे हैं कि यहां जहाजों की आवाजाही धीमी पड़ गई है। महाराष्ट्र से भेजे गए लगभग 1000 कंटेनर इसी बंदरगाह पर फंसे हुए हैं।
इन कंटेनरों में केले, अंगूर, अनार, तरबूज, प्याज और पत्तेदार सब्जियां भरी हुई हैं ऐसा माल जिसकी उम्र कंटेनर में ज्यादा लंबी नहीं होती।
सड़ने लगा करोड़ों का माल
कृषि निर्यात का सबसे बड़ा संकट यही है कि माल ज्यादा दिन टिकता नहीं। फल-सब्जियां सात से दस दिन के भीतर खराब होने लगती हैं। अब हालात यह हैं कि कंटेनर में बंद माल धीरे-धीरे खराब हो रहा है। निर्यातकों का कहना है कि अगर जल्द सप्लाई शुरू नहीं हुई तो करोड़ों रुपये का पूरा माल बर्बाद हो सकता है।
यानी युद्ध किसी और जगह चल रहा है, लेकिन उसका बिल भारतीय किसान चुका रहा है।
रमजान के बाजार पर भी असर
खाड़ी देशों में रमजान के दौरान फलों की मांग चरम पर होती है। खासकर अंगूर और अनार की खपत इस समय तेजी से बढ़ जाती है। इस साल भारत से हजारों टन फल इसी मांग को देखते हुए भेजे गए थे। लेकिन युद्ध के कारण शिपमेंट अटक गई और बाजार खाली रह गया।
निर्यातकों के मुताबिक अगर माल देर से भी पहुंचेगा तो खरीदार मिलना मुश्किल होगा, क्योंकि खराब फल बाजार में बिकते नहीं।

अंगूर के निर्यातकों को सबसे बड़ा झटका
महाराष्ट्र के नासिक इलाके से इस बार लगभग 5000 से 6000 टन अंगूर खाड़ी देशों के लिए भेजे गए थे। लेकिन कंटेनर अटकने के कारण सबसे ज्यादा नुकसान अंगूर के व्यापारियों को हो रहा है। रमजान के दौरान जिस फल की सबसे ज्यादा मांग होती है, वही अब कंटेनरों में सड़ने की कगार पर है।
अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो यह सीजन पूरी तरह चौपट हो सकता है।
भारत के बंदरगाह भी जाम
संकट सिर्फ दुबई तक सीमित नहीं है। मुंबई के Jawaharlal Nehru Port (JNPT) पर भी दुबई जाने वाले कंटेनर अटके पड़े हैं। करीब 80 कंटेनर अंगूर से भरे हुए हैं, जबकि नासिक से आए 200 से ज्यादा कंटेनर लोडिंग का इंतजार कर रहे हैं। निर्यातकों का कहना है कि पोर्ट पर देरी की वजह से लॉजिस्टिक्स लागत भी बढ़ रही है और हर दिन नुकसान का आंकड़ा ऊपर जा रहा है।
किसानों की सरकार से मांग
किसान संगठनों ने सरकार से राहत पैकेज की मांग की है। उनका कहना है कि अगर माल खराब हो गया तो किसानों और निर्यातकों को भारी आर्थिक झटका लगेगा। महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष भरत दिघोले ने मांग रखी है कि किसानों को 1500 रुपये प्रति क्विंटल सब्सिडी दी जाए।
इसके साथ ही पोर्ट शुल्क, विलंब शुल्क माफ करने और अस्थायी सरकारी खरीद योजना शुरू करने की मांग भी उठाई गई है।
जंग का असली असर
मिडिल ईस्ट की जंग का सबसे बड़ा सबक यही है कि वैश्विक व्यापार कितना नाजुक है। एक समुद्री रास्ता बंद हुआ और हजारों किसानों की मेहनत कंटेनरों में सड़ने लगी। अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो यह संकट सिर्फ निर्यातकों तक सीमित नहीं रहेगा—इसका असर कीमतों, बाजार और कृषि अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।
दांत में चिप या सिस्टम में सेंध? खामेनेई ट्रैकिंग पर इंटरनेट का जासूसी उत्सव
